मंकीपॉक्स वायरस क्या है? मंकीपॉक्स का मंकी से क्या कनेक्शन है?

ये एक जानवरो से मनुष्य में फैलनेवाला और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलनेवाला Orthopoxviral इन्फेक्शन है। ये बीमारी चेचक या चिकनपॉक्स के सामान दिखाई देती है। अगर कोई व्यक्ति किसी संक्रमित व्यक्ति या जानवर के निकट संपर्क में आता है तो उसे मंकीपॉक्स होने की संभावना है। यह रोग घावों, शरीर के तरल पदार्थ, श्वसन बूंदों और दूषित सामग्री जैसे बिस्तर आदि के माध्यम से फैलता है। यह वायरस चेचक की तुलना में कम संक्रामक है।

मंकीपॉक्स का मंकी से क्या कनेक्शन है ?

साल 1950 के दशक में दुनियाभर के देशो में पोलियो की बीमारी बढ़ती जा रही थी। Scientists पोलियो के वैक्सीन की खोज में लगे थे। वैक्सीन के ट्रायल के लिए वैज्ञानिकों को बंदरों की जरूरत थी । रिसर्च के लिए बड़ी संख्या में बंदरों को लैब में लाया जा रहा था। ऐसी ही डेनमार्क के कोपेनहेगन के एक लैब में मलेशिया से कुछ बंदर लाये गए। 1958 में इस लैब के बंदरों में अजीब बीमारी देखी गई। इन बंदरों के शरीर पर चेचक जैसे दाने उभर आए थे। जब इन बंदरों की जांच की गई, तो इनमें एक नया वायरस निकला । इस वायरस को नाम दिया गया- मंकीपॉक्स

मनुष्यों में यह पहली बार 1970 में कांगो देश के एक 9 महीने के बच्चे में पाया गया था। ये मामला इसलिए हैरान करने वाला था, क्योंकि 1968 में यहां से चेचक पूरी तरह से खत्म हो चुका था। बाद में जब इस बच्चे के सैम्पल की जांच की गई, तो उसे मंकीपॉक्स की पुष्टि हुई। किसी इंसान के मंकीपॉक्स से संक्रमित होने का पहला मामला सामने आने के बाद कई अफ्रीकी देशों के बंदरो और गिलहरियों की टेस्ट की गयी। इन में मंकीपॉक्स के खिलाफ Antibodies मिली। इससे वैज्ञानिकों ने अनुमान लगाया कि मंकीपॉक्स का मूल स्रोत अफ्रीका ही है। अफ्रीका से ही एशियाई बंदरों में ये वायरस फैला होगा।

2003 में पहली बार ये वायरस अफ्रीका से बाहर फैला। तब अमेरिका में एक व्यक्ति इससे संक्रमित मिला था। उसमें ये संक्रमण पालतू कुत्ते से फैला था। ये कुत्ता अफ्रीकी देश घाना से लाया गया था। फिर सितंबर 2018 में इजरायल, मई 2019 में यूके, दिसंबर 2019 में सिंगापुर जैसे देशों में भी इसके मामले सामने आने लगे। इस साल २०२२ में एक बार फिर से मंकीपॉक्स का कहर शुरू हो गया है। हालांकि, सालों बाद भी मंकीपॉक्स के संक्रमण और ट्रांसमिशन को लेकर कई स्टडी हो रही है।

मंकीपॉक्स जानवरों से मनुष्यों में कैसे फैलता है ?

जब कोई व्यक्ति मंकीपॉक्स से संक्रमित जानवर के संपर्क में आता है तो उसे मंकीपॉक्स होने की संभावना होती है। इन में प्रमुख रूप से चूहे, गिलहरी, बंदर आदि शामिल हैं। बीमार और मृत जानवरों के संपर्क में न आना ही मात्रा उपाय है जो मनुष्यों को मंकीपॉक्स होने से बचा सकता है। खासतौर पर जहां मंकीपॉक्स स्थानिक बीमारी है, वहां कोई भी ऐसा खाद्य पदार्थ खाना जिसमें जानवरों का मांस या उनके शरीर का अन्य कोई हिस्सा है, मंकीपॉक्स होने के खतरे को काफी हद तक बढ़ा सकता है। मंकीपॉक्स किसी संक्रमित जानवर के काटने से, या उसके खून, शरीर के तरल पदार्थ, या फर को छूने से हो सकता है।

मंकीपॉक्स का मनुष्य से मनुष्य में संक्रमण

अगर मंकीपॉक्स के मनुष्य से मनुष्य में फैलने के बारे में बात कि जाए तो यह संक्रमित के संपर्क में आने से फैलता है। अगर कोई व्यक्ति मंकीपॉक्स से संक्रमित है तो उसके सांस, छींकते, खासतें या अन्य किसी तरह से श्वसन कणों की बूंदों के संपर्क में आने से हो सकता है। अगर कोई व्यक्ति या स्वास्थ्य कार्यकर्ता लंबे समय तक मंकीपॉक्स रोगी की देखरेख करता है तो उसे भी मंकीपॉक्स होने की आशंका होती है। मां से भ्रूण (जिससे जन्मजात मंकीपॉक्स हो सकता है) या जन्म के दौरान और बाद में निकट संपर्क के दौरान, प्लेसेंटा के माध्यम से भी संचरण हो सकता है। शारीरिक संबंध स्थापित करने से भी मंकीपॉक्स होने की आशंका काफी ज्यादा है |

मंकीपॉक्स के लक्षण क्या है?

मंकीपॉक्स के लिए संक्रमण से लक्षणों तक का समय आम तौर पर 5 से 21 दिनों तक हो सकता है। बुखार के साथ-साथ संक्रमित को मांसपेशियों में दर्द, जकड़न और कमजोरी महसूस हो सकती है। इसके साथ ही जैसे-जैसे मंकीपॉक्स की बीमारी बढ़ने लगती है वैसे-वैसे संक्रमित रोगी के लिम्फ नोड्स (Lymph Nodes) में सूजन आने लगती है जो कि मंकीपॉक्स की सबसे बड़ी पहचान है। मंकीपॉक्स होने पर रोगी के शरीर में पांच दिनों के भीतर शरीर में चेचक यानि माता के निशान बनने लग जाते हैं जिससे रोगी को और भी कई समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
मंकीपॉक्स के निम्नलिखित लक्षण सामने आये है :-
1) बुखार
2) ठंड लगना
3) थकावट
4) पीठ दर्द
5) सिरदर्द
6) मांसपेशियों के दर्द
7) सूजी हुई लसीका ग्रंथियां (Swollen Lymph Nodes)

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